Story of Ganesh Chaturthi

Happy-Ganpati-Chaturthi-2021

‘श्री गणेशाय नम:’

२०२१ में १० सितम्बर को गणेश चतुर्थी है

संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत करने पर घर-परिवार में आ रही विपदा दूर हो जाती है और साथ साथ कई दिनों से रुके मांगलिक कार्य संपन्न होने लगते है। भगवान श्री गणेश की पूजा के दौरान संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत की कथा पढ़ना अथवा सुनना जरूरी है।

श्री गणेश चतुर्थी व्रत की सबसे पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे बैठी थी भगवान शिव जी साथ!
माता पार्वती जी ने भगवान शिव से समय व्यतीत करने के लिए चौपड़ खेलने को कह दिया।

शिव चौपड़ खेलने के लिए तैयार भी हो गए, परंतु इस खेल में हार-जीत का फैसला करने वाला कौन होगा, फिर भगवान शिव ने कुछ तिनके एकत्रित कर उसका एक पुतला बनाकर उसकी प्राण-प्रतिष्ठा कर दी और पुतले से कहा- ‘बेटा, हम चौपड़ खेलना चाहते हैं और तुम बताना कि हम दोनों में से कौन हारा और कौन जीता?’

उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का चौपड़ खेल शुरू हो गया। खेल 3 बार चला और संयोग से तीनों बार माता जीत गईं परतु खेल समाप्त होने के बाद बालक ने महादेव को विजयी बताया।

यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित होकर बालक को लंगड़ा होने, कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। बालक ने माता पार्वती से माफी मांगी और कहा कि यह मुझसे अज्ञानतावश ऐसा हुआ है, मैंने किसी द्वेष भाव में ऐसा नहीं किया।

बालक द्वारा क्षमा मांगने पर माता ने कहा- ‘यहां गणेश पूजन के लिए जब नागकन्याएं आएंगी, तब उनके कहे अनुसार तुम गणेश व्रत करो, ऐसा करने से तुम मुझे प्राप्त करोगे और यह कहकर माता पार्वती शिव के साथ कैलाश पर्वत पर चली गईं।

एक वर्ष के बाद उसी स्थान पर नागकन्याएं आईं और नागकन्याओं से श्री गणेश के व्रत की विधि मालूम करने पर उस शापित ने 21 दिन लगातार गणेश जी का व्रत किया।
उसकी श्रद्धा से गणेश जी प्रसन्न होकर बालक को मनोवांछित फल मांगने के लिए कहा। उस पर उस बालक ने कहा- ‘हे विनायक! मुझमें इतनी शक्ति दीजिए कि मैं अपने पैरों से चलकर अपने माता-पिता के साथ कैलाश पर्वत पर पहुंच सकूं और वे यह देख प्रसन्न हों।’

तब बालक को वरदान देकर श्री गणेश अंतर्ध्यान हो गए। इसके बाद वह बालक कैलाश पर्वत पर पहुंच गया और कैलाश पर्वत पर पहुंचने की अपनी कथा उसने भगवान शिव को सुनाई। चौपड़ वाले दिन से माता पार्वती शिवजी से विमुख हो गई थीं अत: देवी के रुष्ट होने पर भगवान शिव ने भी बालक के बताए अनुसार 21 दिनों तक श्री गणेश का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से माता पार्वती के मन से भगवान शिव के लिए जो नाराजगी थी, वह समाप्त हो गई।

तब यह व्रत विधि भगवान शंकर ने माता पार्वती को बताई। यह सुनकर माता पार्वती के मन में भी अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जागृत हुई। तब माता पार्वती ने भी 21 दिन तक श्री गणेश का व्रत किया तथा दूर्वा, फूल और लड्डूओं से गणेशजी का पूजन-अर्चन किया। व्रत के 21वें दिन कार्तिकेय स्वयं माता पार्वतीजी से आ मिले। उस दिन से श्री गणेश चतुर्थी का यह व्रत समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत माना जाता है। इस व्रत को करने से मनुष्‍य के सारे कष्ट दूर होकर मनुष्य को समस्त सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं।

Also Read Other Religious Story

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *