Dont afraid from hard work and exams for success

सफलता के लिए कठिन परीक्षा और मेहनत से मत डरो

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ये कहानी उत्तराखंड की मूर्तिकार मुकेश और पत्थर की है!

एक बार की बात है मुकेश पहाड़ से मूर्ति बनाने के लिए पत्थर लाया

और मूर्ति बनाने के लिए जैसे ही टूल्स लिया की देखा पत्थर से पानी का रिसाब हो रहा है और मानो बोल रहा है

  • “मुझे मत मारो”
  • “मैं हथोड़ा की मार नहीं झेल सकता”
  • “प्लीज मुझे छोड़ दो”
  • “मुझे आराम पसंद है”

मुकेश मूर्ति बनाने के लिए दूसरा पत्थर लाया और गणेश जी की मूर्ति अपने टूल से काट काट कर और हथोड़ा मार मार कर बना डाला |

बगल में रखा पहला पत्थर बहुत ही खुश हो रहा था की चलो मैं इस मार से बच गया|

अगले दिन ही गाँव बाले आकर पूछा!

मुकेश गणेश जी की मूर्ति तैयार हो गया?

जी साहब गणेश जी की मूर्ति तैयार है|

गाँव बाले गणेश जी की मूर्ति उठाया और बोला कोई दूसरा पत्थर है तो दे दो भगवन के बगल में रखेंगे!

मुकेश बगल में रखा पहला पत्थर दे दिया और गाँव बाले गणेश जी की मूर्ति और पहला पत्थर उठा कर ले गया|

पहला पत्थर रोने लगा अरे कहा ले जा रहे हो मुझे|

  • मुझे यही रहना है|
  • मुझे आराम पसंद है|

अब गाँव बाले गणेश जी की पूजा करने लगे

हर कोई गणेश जी पर जल, फूल और प्रसाद चढ़ा कर पूजा करने लगे|

बगल में रखा पत्थर पर नारियल फोड़ने लगे|

अब आलसी पत्थर फिर रोने लगा मैं मर गया|

  • हाय सबने मुझे मार दिया|
  • हाय अब मैं क्या करू|
  • बचाओ मुझे कोई|

आलसी पत्थर ने गणेश जी से पूछा|

आपको तो मजा आ गया| सब लोग पूजा कर रहे है|

गणेश जी ने कहा पूजा ऐसे नहीं होती |

इसके लिए मैंने बहुत हथोड़े की मार झेला है और कठिन परीक्षा में पास होने के बाद इस रूप मैं आया हूँ|

Conclusion:

कठिन परीक्षा और मेहनत से:

  • कठिन परीक्षा और मेहनत से पत्थर में भी जान आ जाती है|
  • समान्य इंसान भी पाबरफुल बन जाता है उसकी पूजा होती है|
  • समान्य स्टूडेंट भी टॉप कर जाता है|
  • छोटा ब्यापारी भी बड़ा ब्यापारी बन जाता है|